Sunday, April 10, 2016

Exposing gujjar\gurjar गुर्जर\गुज्जर जाति समाज में इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर अन्य क्षत्रिय राजपूत वंश को गुर्जर मूल का बता रही है!

‪#‎गूजर‬ ख़ुद को ‪#‎विदेशी‬ से ‪#‎क्षत्रिय‬ स्वघोषित करने में कर रहे है लाखों खर्च.....










मित्रों आज कल गूजर- शोसल मीडिया पर हमारे पूर्वजों को गुर्जर घोषित कर रहे है।
इन लोगो ने मेरे फेसबुक पेज, पर बनाई गई कई प्रतिहार/परिहार वंश की पोस्ट को कापी कर और प्रतिहार/परिहार की जगह गुर्जर जोड दिया है आप सभी इनकी कारस्तानी देख सकते है और गलत रेफरेंस भी दे दिया है। अरे गूजरों मानलो की हम ही है तुम्हारे बाप है। मैने कई रेफरेंस भी मिलाये पर कोई भी सही नही था।
नीचे यह है उस फेसबुक पेज की लिंक जिसमे गुर्जर अपने को महान बता रहे है। और सभी क्षत्रिय वंश को गुज्जर मूल का बता रहे हैं।
(1) Original post link :- यह मेरे फेसबुक पेज नागौद रियासत के वह पोस्ट की लिंक है जो मैने बनाई है। नीचे लिंक है इसी पोस्ट की जिसे गुज्जरों ने अपने पेज पर इडिट किया है।
== (1) Edit by gujjar गुज्जरो दवारा - मेरी पोस्ट के साथ छेड़छाड़ का लिंक उस पोस्ट की है जिसे गुज्जरों ने इडिट किया है
(2) Original post link - यह पोस्ट मैने बनाया था। पोस्ट का टाइटल था " जालौर किले का इतिहास" जिसे गुज्जरों ने छेडछाड कर प्रतिहार/परिहार की जगह गुर्जर जोड दिया है। नीचे इसी पोस्ट का लिंक है जो गुर्जर अपने पेज पर हमे बदनाम कर रहे है
== (2) edit by gujjars गुज्जरों द्वारा- यह दूसरी लिंक है देखिए कैसे गुज्जरों ने छेडछाड की है हमारे इतिहास के साथ
ये वो महान योद्धा और क्षत्रिय वंश के राजपूत है जिसे गूजर लोग गूजर मूल बता रहे है
नागभट्ट प्रतिहार
मिहिर भोज प्रतिहार
वत्सराज प्रतिहार
पृथ्वीराज चौहान
छत्रपति शिवाजी
बप्पा रावल
इनके अलावा चौहान, परमार, सोलंकी, बाघेला, राठौर, गुहिलौत, तंवर वंश को भी गुर्जर बता रहे है
और पूरे प्रतिहार वंश को ही गुर्जर बता रहे
कुछ पिक्चर भेज रहा हूँ जरुर देखे
---- गू जरों से सवाल ----
1- प्रतिहार सम्राटो ने कन्नौज को राजधानी बनाकर पुरे उत्तर भारत में राज किया था। इनका राज बिहार मालवा तक था। उनके वंशज आज के प्रतिहार/परिहार/पढ़ियार राजपूत हैं जो कन्नौज बिहार पूर्वी यूपी राजस्थान गुजरात सब जगह मिलते हैं पर गुज्जर जाति को कन्नौज में और ईस्ट यूपी बिहार गुजरात में कोई नही जानता। ऐसा क्यों ?
2-अगर प्रतिहार/परिहार गुज्जर थे तो कन्नौज और उसके आस पास कोई गुज्जर क्यों नही है?
3-गुर्जरों में प्रतिहार नाम का कोई वंश क्यूँ नही है? जबकि क्षत्रिय राजपूतो में लाखो की संख्या में प्रतिहार/परिहार वंश है।
4-प्रतिहारो का गोत्र कौशिक था जो आज भी प्रतिहार राजपूतो का गोत्र है।
अगर गुर्जर क्षत्रिय थे तो दुसरी द्विज जातियों जैसे ब्राह्मण राजपूत वैश्य की तरह गुज्जरो का कोई ऋषि गोत्र क्यों नही है?जबकि उस समय प्रतिहारो का गोत्र कश्यप था और आज भी है।
पहले चौहानो का गोत्र वत्स था और आज भी वत्स है। गुज्जरो का क्यूँ नही है?
5-अगर गूजर मिहिरभोज नागभट्ट को अपना पुरखा मानते हैं तो किसी गुज्जर को अंग्रेजो और भंडारकर जैसो की बकचोदी से पहले ये जानकारी क्यों नही थी क्योंकि उससे पहले गुजर खुद को ब्रिटिश गजेटियरो के अनुसार राजपूतो की नाजायज औलाद मानते थे।
मिहिरभोज के 1000 साल बाद अचानक से गूजरों को ब्रह्मज्ञान हो गया कि मिहिरभोज तुम्हारे पुरखे थे????
उससे पहले क्यों नही पता था??
पुरखे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को इतिहास की मौखिक जानकारी जरूर देते हैं पर तुम्हारे पुरखे तो तुम्हे बस भैंस चोरी की कहानियां ही सुनाते थे अब तुम अचानक से प्रतिहार/परिहार बन गए???~??~
6- प्रतिहारो/परिहारों के गल्लका के शिलालेख में स्पष्ट लिखा है के प्रतिहार सम्राट नागभट्ट जिन्हें गुर्जरा प्रतिहार वंश का संस्थापक भी माना जाता है ने गुर्जरा राज्य पर हमला कर गुज्जरों को गुर्जरा देश से बाहर खदेड़ा व अपना राज्य स्थापित किया... अगर प्रतिहार गुज्जर थे तो खुद को ही अपने देश में हराकर बाहर क्यों खड़ेंगे ?? मिहिर भोज के पिता प्रतिहार क्षत्रिय और पुत्र गुज्जर कैसे ??
7- हरश्चरित्र में गुजरादेश का जिक्र बाण भट्ट ने एक राज्य एक भू भाग के रूप में किया है यही बात पंचतंत्र और कई विदेशी सैलानियों के रिकार्ड्स में भी पुख्ता होती है। इस गुर्जरा देस में गुज्जरों को खदेड़ने के बाद जिस भी वंश ने राज्य किया गुर्जरा नरपति या गुर्जर नरेश कहलाया। यदि गुज्जर विदेशी जाती है तो दक्षिण से आये हुए सोलंकी/चालुक्य जैसे वंश भी गुर्जरा पर फ़तेह पाने के बाद गुर्जरा नरेश या गुर्जरेश्वर क्यों कहलाये ?
8- गुज्जर एक विदेशी जाती है जो हूणों के साथ भारत आई जिसका मुख्य काम गोपालन और दूध मीट की सेना को सप्लाई था तो आज भी गुजरात में गुर्जरा ब्राह्मण गुर्जरा वैश्य गुर्जरा मिस्त्री गुर्जरा धोभी गुर्जरा नाई जैसी जातियाँ कैसे मिलती है ??
9- प्रतिहार/परिहार राजा हरिश्चंद्र को मंडोर के शीलालेखों में द्विज लिखा है ,। यह मिहिर भोज के भी पूर्वज थे। रिग वेद और मनुस्मृति के अनुसार द्विज केवल आर्य क्षत्रिय और ब्राह्मण जातियाँ ही हो सकती थीं। अगर हरिशन्द्र आर्य क्षत्रिय थे तो उनके वंशज विदेशी शूद्र गुज्जर कैसे ??
10- प्रतिहारों/परिहारों की राजोरगढ़ के शिलालेखों में प्रतिहारों को गुर्जर प्रतिहार लिखा है ये शिलालेख मण्डोर और गललका के शिलालेख से बाद के है यानी प्रतिहारों के गुर्जरा राज्य पर अधिपत्य के बाद स्थापित किये गए। सभी इतिहासकार इन्हें स्थान सूचक मानतें हैं। तो कुछ विदेशी इतिहासकार ये लिखते है के 12वि पंक्ति में गूजरों का पास के खेतों में खेती करने का जिक्र किया गया है तो इस वजह से कहा जा सकता है प्रतिहार गुज्जर थे। अब ये समझा दी भैया के राजा और क्षत्रिय की पदवी पा चुकी राजवंशी जाती क्यों खेती करेगी ?? जबकि ये तो शूद्रों का कार्य माना जाता था। यानि साफ़ है के गुर्जरा देस से राजोर आये प्रतिहार ही गुर्जरा प्रतिहार कहलाए जिनके राज्य में गुर्जर देश से आये हुए गर्जर यानी गुर्जरा के नागरिक खेती करते थे और ये प्रतिहारों से अलग थे ।।।
11- अवंती के प्रतिहार राजा, वत्सराज के ताम्रपत्रों और शिलालेखों से यह पता चलता है के वत्सराज प्रतिहार ने नंदपुरी की पहली और आखिरी गुज्जर बस्ती को उखाड़ फेंका नेस्तेनाबूत कर दिया और भत्रवर्ध चौहान को जयभट्ट गुज्जर के स्थान पर जागीर दी। इस शिलालेखों से भी प्रतिहार और गुज्जरों के अलग होने के सबूत मिलते हैं तो प्रतिहार और गुज्जर एक कैसे ???
12- देवनारायण जी की कथा के अनुसार भी उनके पिता चौहान क्षत्रिय और माता गुजरी थी जिससे गूजरों की बगड़ावत वंश निकला यही उधारण राणा हर राय देव से कलस्यां गोत्र के गुज्जरों को उतपत्ति ( करनाल और मुज़्ज़फरगर ब्रिटिश गजट पढ़ें या सदियों पुराने राजपूतों के भाट रिकॉर्ड पढ़ें।) , ग्वालियर के राजा मान सिंह तंवर की गुजरी रानी मृगनयनी से तोंगर या तंवर गुज्जरों की उत्पत्ति के प्रमाण मिलतें हैं तो प्रीतिहार राजपूत वंश गुज्जरों से कैसे उतपन्न हुआ ? क्षत्रिय से शुद्र तो बना जा सकता है पर शुद्र से क्षत्रिय कैसे बना जा सकता है ??
13- जहाँ जहाँ प्रतिहार वंश का राज रहा है वहाँ आज भी प्रतिहार राजपूतों की बस्ती है और यह बस्तियाँ हजारों साल पुरानी है पर यहाँ गुज्जर प्रतिहार नहीं पाये जाते।
मंडोर के इलाके में इन्दा व देवल प्रतिहार कन्नौज में कलहंस और मूल प्रतिहार , मध्य प्रदेश में प्रतिहारों को नागोद रियासत व गुजरात में प्रतिहार राजपूतों के आज भी 3 रियासत व् 200 से अधिक गाँव। न कन्नौज में गुज्जर है ना नागोद में ना गुजरात में। और सारे रजवाड़े भी क्षत्रिय व राजपूत प्रतिहार माने जाते है जबकि गुज्जरों में तो प्रतिहार गोत्र व खाप ही नहीं है तो प्रतिहार गुज्जर कैसे ??
14- मिहिर भोज नागभट्ट हरिश्चंद्र प्रतिहारों के शिलालेखों और ताम्रपत्रों में इन तीनों को सूर्य वंशी रघु वंशी और लक्षमण के वंश में लिखा है ; गुज्जर विदेशी है तो ये सब खुद को आर्य क्षत्रिय क्यों बता के गए ??!
15- राजोरगढ़ के आलावा ग्वालियर कन्नोज मंडोर गल्लका अवंती उज्जैन के शिलालेखों और ताम्रपत्रों में प्रतिहारों के लिये किसी भी पंक्ति व लेख में गुर्जर गू जर गू गुर्जरा या कोई भी मिलता जुलता शब्द या उपाधि नहीं मिलती है साफ है सिर्फ राजोरगढ़ में गुर्जरा देस से आई हुई खाप को गुर्जरा नरेश को उपाधि मिली !! जब बाकि देश के प्रतिहार गुज्जर नहीं तो राजोरगढ़ के प्रतिहार गुज्जर कैसे ??
गू + जर == गूजर

15 comments:

  1. फोटो पर क्रास करने से गुज॔रो का ईतीहास नही मिट जाएगा। तुमहे राजपूत होने का अंहकार है। पहले यह पता कर लेना की महाराणा प्रताप के पिता महाराज उदय सिंह कि जान किसने बचाई थी। वो गुज॔र जाती कि दाई मा थी जिसने अपने बेटे कि बली चड़ा कर मुगलो से महाराज उदय सिंह कि जान बचाई थी। गुज॔रो कि विरता के कारण ही महाराणा प्रताप कि सेना मजबूत थी। महाराणा प्रताप भगवान देवनारायण को भी बहूत मानते थे ईसलीए उनके चिततोड़ के किले मे भगवान देवनारायण का मंदिर हे। समय के साथ गुज॔रो का ईतीहास बदलता गया। Internet पर भी भ्रमित जानकारी डाली हे। गुज॔रो का ईतीहास किसीको भी सही नही पता। गुज॔रो और राजपूतो के कारण ही मुगल टिक नही पाए।

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    1. Bhai apni jati ki history pado .....dusro ka name ko apna bap mat bano

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    2. Bhai apni jati ki history pado .....dusro ka name ko apna bap mat bano

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    3. Sanjay gujjar yehi tumhari sachhai hai thik hai na tum azadi se pehle apna status uchha karna chah rahe thay jise sanskritization kehtay hain ab tu man naa man bakio ko sachhai pata hai.
      Aur haan maharana udai pratap ko bachane waali panna dai Khinchi Chauhan Rajput thi samjha

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  2. Bhai दाई मा ka hame pata h ......or bargujjar ka tuje pata hona jahiye ..ham rajput h ... Or bo rahige ... History se koi b chhedkhani nhi karni h

    Or Jada janana h to rajorgard and fataypur sikari sila abhilekh pad Lena

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  3. Bhai दाई मा ka hame pata h ......or bargujjar ka tuje pata hona jahiye ..ham rajput h ... Or bo rahige ... History se koi b chhedkhani nhi karni h

    Or Jada janana h to rajorgard and fataypur sikari sila abhilekh pad Lena

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  4. You both of you my Brothers...I m just working as Research Scholar n eblogger n editor content analyst..... I make u understand in very very brief n I hope you ppl will definitely get right thing in a single brief....... m ab Hindi m baat Karta hu ..... dekhiye jitna mane upar padha aap log apne aapko superior dikhana chahte ho.... vase superiority jasi Hume baat nahi Karni chahiye... agar baat Kare to k Kiska claim kitna right Aur authentic h Aur sabk liye accept Karne wala ho.... bas m ek question poochunga aur aap Sab logon ko jawab mil jayega...... aap ki pariwarik Bhasha(language) jise aap Aur aapke poorwaj b istemaal karte honge? Uska naam kya h??? Bas ek word m jawab Aur aapko aapka answer mil jayega....

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  5. Kya hua bhai ab tak koi reply nahi aya...,, na Mr Jitender ka, na Mr Sarthak ka or na Mr Sanjay Gurjar ka????? Reply jase hee aap log doge aap ko pata chal jayega k kon kitna sahi h, Kiska claim kitna sahi h Aur kon kitna authentic Aur purana h ????

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  6. Chalo bhai m clear kar deta hu qki mjhe lagta aap logo m se to koi jawab aya nahi.... Dekhiye jo jyada purana Aur authentic h vo h "Gurjar" ... Aur jo language jyada Purani Aur authentic h vo h "Gurjari" jo ki Bahut hee pracheen bhasha h.... jo ki North India ki Kai bhashaon ki janani h Aur lagbhag lagbhag 60% logon dwara ya to direct boli jati h ya isme se nikli hu ya bani hui bhasha k roop m boli jati h....... Isliye jyada purani Aur authentic jaati ( Caste) Gurjar hee h.

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    1. Thank you so much sharma ji I agree with you because I'm also PhD student

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  7. kuch Aur post b padhe per mjhe kuch post se laga k aapko sahi jaankari deni chaiye ....ek Research scholar Aur content analyst Google ... m yahan aapko clear kar deta hu k Prithviraj Chauhan k Pita Someshwar jo kee sare pramaan Aur itihaskaaron k gehan adhyyan k baad pata chalta h k wo Gurjar Caste se the... unki isi kadi se pata chalta h k Prithviraj chauhan Gurjar Caste se sambhandit h.... Shakambhari jo kee ab Sambhar k naam se jana jata h ... Wahan Gurjar Chauhan gotra k gurjar h jo kee Angreji Sarkar m Bahut hee satay Gaye Aur unhe tadipar kark dekhte hee goli maarne ka aadesh tha... Aur jo itihaas aaj hamare samne h WO bahut hee brahmit tareek se (Manipulated way) Gurjaron ki upeksha kark likha gaya h ... magar qki ab Google jasi parties emerged hui h jo ki kisi ki pakshdhar nahi h .... Aur haamari content/editor Analyst team ne saari pukhta jaankariyon k baad pata lagaya h k bahut hee pracheen Bhasha sirf Gurjari hi h Aur iss kadi m agar ek baad ek peeche chalte jayenge to Prithviraj Chauhan k Pita Someswar Gurjar hee the aur Prithviraj Raj Chauhan ka Janam aaj k Gurjarat m hua tha.... Gurjarat kee Seema pehle Pakistan k antim bhag aur pore Uttar Bharat Aur kuch kuch Dakshin Aur poorva k ilakon tak thi jise Gurjargadh(Gurjargarh) bhi kaha jata tha.ye b sach h k Gurjaron n hee apne naam per Gir k jangalon ka naam rakhwaya tha jiska matlab kaha jata tha Sheron k rehne ki jagah..... in sabdawaliyon ko Angrejo n Gurjaron kee upeksha kark padhe jaane wale itihaas se hatwa diya.isi Karan peeche gayi hui 150 saalon ki peedhi ko brahmit jaankaari h.

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    1. Sharma Ji aap muje apne mob se ek bar call kriye muje apse bahot kuch jankari chahiye
      Plz sir call me
      9753158402

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  8. Bina kuch soche bina kuch samje kis pr injam nahi lgan chiye

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  9. Bhadve Gurjar ke rakhelo ki olado kyu apni pehchan kholna chahte ho Gurjaro ko nicha dikha kr salo tumhara itihas kahi bhi nahi hai Kya dusre ka itihas churate ho bhadwo

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